मंत्राक्ष एक साधना है, स्वयं तक आने की। मंत्राक्ष एक समाधान है, हर समस्या का। मंत्रों के बारे अक्ष ज्ञान आत्मा का शोषण करने की प्रक्रिया है। मंत्राक्ष वास्तविकता में, शक्ति और समर पाठ से सत्त्वज्ञान हमारे ही अंदर है, मगर हम उन आंतरिक विकासों से अज्ञात हैं। शिक्षा जागरण की इस प्रक्रिया में बहुत से साधनों की ज़रूरत पड़ती है। मंत्राक्ष में समागत हैं ध्वनि, स्वर मुद्रा , बीजाक्षर मंत्रों के साथ साथ योग, भावना , रंग और आसन का |
मंत्राक्ष एक ध्यान साधना है, जो आपका आंतरिक सुख-शांति के साथ अनंत ऊर्जा का भंडार देती है। मंत्राक्ष श्रुतः सवेंगी महाश्रमण की वो खोज है, जो आज के तनाव ग्रस्त और भटके लोगों के लिए सबसे सरल और सुंदर आश्रय है |
मंत्राक्ष का प्रभाव आपके जीवन की गहराई तक पहुँचकर, उसे मूल से रूपांतरित करता है। यह आपके भीतर की आंतरिक चेतना को प्रज्वलित कर, ऊर्जा और शक्ति का अभूतपूर्व संग्रह करता है, जिससे सुषुप्त तांत्रिक तंत्रिकाओं का शुद्धिकरण होता है—यह है मंत्राक्ष का सुस्पष्ट एवं परिवर्तनकारी प्रभाव, जो आपको भीतर से सशक्त बनाता है। मंत्राक्ष की अद्वितीय शक्ति से कुंडलिनी का उत्थान, सप्तचक्रों की पूर्ण जागृति और विखंडित चेतना का एकीकरण (परम समन्वय) तत्काल एवं सहजता से संभव हो जाता है। हालाँकि, मंत्राक्ष का वास्तविक और गहरा प्रभाव केवल तर्क से नहीं, बल्कि अनुभव से जाना जाता है; आप इसकी उपलब्धियों को प्राप्त करने के पश्चात् ही, इसके महत्व और शक्ति को अधिक स्पष्टता और गहनता से समझ पाएँगे।
मंत्राक्ष एक साधना है, स्वयं तक आने की। मंत्राक्ष एक समाधान है, हर समस्या का। मंत्रों के बारे अक्ष ज्ञान आत्मा का शोषण करने की प्रक्रिया है। मंत्राक्ष वास्तविकता में, शक्ति और समर पाठ से सत्त्वज्ञान हमारे ही अंदर है, मगर हम उन आंतरिक विकासों से अज्ञात हैं। शिक्षा जागरण की इस प्रक्रिया में बहुत से साधनों की ज़रूरत पड़ती है। मंत्राक्ष में समागत हैं ध्वनि, स्वर मुद्रा , बीजाक्षर मंत्रों के साथ साथ योग, भावना , रंग और आसन का | मंत्राक्ष एक ध्यान साधना है, जो आपका आंतरिक सुख-शांति के साथ अनंत ऊर्जा का भंडार देती है। मंत्राक्ष श्रुतः सवेंगी महाश्रमण की वो खोज है, जो आज के तनाव ग्रस्त और भटके लोगों के लिए सबसे सरल और सुंदर आश्रय है |
- मानसिक स्वस्थता
- शारीरिक स्वस्थता
- आत्मवस्तु का दुबारा
- उद्दीयस्ना से मुक्ति
- मन:शांति
- चक्रों का साधना
- मन:शुद्धता
- चक्रों का जागरण
- चित्रमैत्री भाव
- प्रज्ञावता
- एकाग्रता
- स्वर साधन
- शारीरिक स्वस्थता
- स्वर विद्या का अभ्यासी
- डर से मुक्ति
- अन्य बाधाओं से राहत
- आत्म वृद्धि
- साहस
- लगन शीलता
- आज्ञाकारिता
- संवादहीनता
- आत्मजागरण
- आत्मनिर्देशन
- आत्मशिक्षा
- आत्मनियंत्रण
- आदर्शपूर्ण व्यवहार
- सदाचार
- सकारात्मकता
- सहजता
- वचनसाधना
- स्पष्ट वादिता
- सज्जनता
- सकारात्मक भावना
- खुशमिजाजी
- स्वतंत्रता
- बंधुत्व
- पूर्णवादी
- निर्णायिकता
- कुटुंबव्यवहारिकता
- आध्यात्मिकता
- मार्ग दर्शन कला
- बेहतर कला
- स्वयंवार
- विनम्रशीलता
- संवेदनशीलना
- विश्वसनीयता
- निडरता।
- अन्य लाभ (शब्दसूची):
- आवश्यकता
- संयत भावना
- अवतर्क-परिणामी
- समन्वयसक्ता
- योग्यता
- सत्यव्यवहारो
- आनंदपूर्णता
- सुलभता
- व्यावक्रामकता
- साक्षरता
- ऊर्ध्वजिन व्यक्तित्व
- अटलता
- प्रसन्नता
- आत्म कल्पना
- लोक प्रियता
- सं कुलित भावना
- समझदार
- अनुकूलता
- अनुकूलनशीलता
- विश्लेषण क्षमता
- शान्ति
- इ ह-इच्छाशक्ति
- प्रवृत्ति
- प्रकृति कल्पना
- बोध
- आज्ञा निर्देशन ता
- अदृता
- स्वार्थ निवारण
- वफादारी
- उज्ज्वर व्यक्तित्व
- सत्यकथनशीलता
- आलोचनात्मकता
- विचार शीलता
- विभोक्ता
- निष्ठावान
- सहिष्णुता
- क्रियावाद
- साहसता
- निष्क शास्त्र
- क्षमाशीलता
- अंत ओजभाव
- सामाजिकता
- व्यवस्थित
- आव का सूक्ष्म संचार
- व्यावाशिक प्रसन्नता
- पवित्र रहस्य
- नाग गोपालन
- सम्पन्नता
- पवित्र भावना
- सरलता।
- पंडित्य
- प्रसतिकान्त
- परोपकारिता
- पुरुषार्थता
- मनवता
- प्रणति
- वाचनिक गंभीरता
- आंतरिक प्रकाश
- उच्छायन व्यक्तित्व
- प्रबुद्धता